श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.7.62 
দিব্য-মযূরের পাখা লৈ’ দুই জনে
বাতাস করিতে আছে দেহে সর্ব-ক্ষণে
दिव्य-मयूरेर पाखा लै’ दुइ जने
वातास करिते आछे देहे सर्व-क्षणे
 
 
अनुवाद
दो व्यक्ति लगातार मोर पंखों से बने भव्य पंखों से उन्हें हवा कर रहे थे।
 
Two men were constantly fanning them with magnificent fans made of peacock feathers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)