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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
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श्लोक 61
श्लोक
2.7.61
দিব্য আলবাটি দুই শোভে দুই পাশে
পান খাঞা অধর দেখি’ দেখি’ হাসে
दिव्य आलवाटि दुइ शोभे दुइ पाशे
पान खाञा अधर देखि’ देखि’ हासे
अनुवाद
उसके दोनों तरफ़ दो आलीशान थूकदान थे। पान चबाते हुए वह मुस्कुराया और अपने होठों की तरफ़ देखा।
On either side of him were two luxurious spittoons. Chewing betel leaf, he smiled and looked at his lips.
तात्पर्य
आलवाटी शब्द थूकदान का प्रतीक है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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