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श्लोक 2.7.58  |
দিব্য-খট্টা হিঙ্গুলে, পিতলে শোভা করে
দিব্য-চন্দ্রাতপ তিন তাহার উপরে |
दिव्य-खट्टा हिङ्गुले, पितले शोभा करे
दिव्य-चन्द्रातप तिन ताहार उपरे |
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| अनुवाद |
| वह पीतल के आर्मरेस्ट से सजे एक भव्य लाल रंग के सोफे पर बैठा था। उसके सिर के ऊपर तीन भव्य छतरियाँ थीं। |
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| He sat on a magnificent red sofa with brass armrests, and above his head were three magnificent umbrellas. |
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