श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  2.7.57 
বসিযা আছেন পুণ্ডরীক মহাশয
রাজ-পুত্র হেন করিযাছেন বিজয
वसिया आछेन पुण्डरीक महाशय
राज-पुत्र हेन करियाछेन विजय
 
 
अनुवाद
पुण्डरीक महाशय जिस प्रकार वहां बैठे थे, ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे कोई राजकुमार हों।
 
The way Mr. Pundrik was sitting there, it seemed as if he was a prince.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)