श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.7.56 
শুনি’ বিদ্যানিধি বড সন্তোষ হৈলাপরম
গৌরবে সম্ভাষিবারে লাগিলা
शुनि’ विद्यानिधि बड सन्तोष हैलापरम
गौरवे सम्भाषिबारे लागिला
 
 
अनुवाद
यह सुनकर विद्यानिधि को बड़ी प्रसन्नता हुई और वह बड़े आदर के साथ उनसे बात करने लगा।
 
Hearing this, Vidyanidhi was very happy and started talking to him with great respect.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)