श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.7.55 
ভক্তি-পথে রত, সঙ্গ ভক্তের সহিতে
শুনিযা তোমার নাম আইলা দেখিতে”
भक्ति-पथे रत, सङ्ग भक्तेर सहिते
शुनिया तोमार नाम आइला देखिते”
 
 
अनुवाद
"वे निरंतर भक्ति में लीन रहते हैं और सदैव भक्तों की संगति करते हैं। आपका नाम सुनकर वे आपके दर्शन करने आए हैं।"
 
"He is constantly absorbed in devotional service and always keeps company with devotees. Hearing your name, he has come to see you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)