श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 53-54
 
 
श्लोक  2.7.53-54 
মুকুন্দ বলেন,—“শ্রী-গদাধর’ নাম
শিশু হৈতে সṁসারে বিরক্ত ভাগ্যবান্
’মাধব মিশ্রের পুত্র’ কহি ব্যবহারে
সকল বৈষ্ণব প্রীতি বাসেন ইঙ্হারে
मुकुन्द बलेन,—“श्री-गदाधर’ नाम
शिशु हैते सꣳसारे विरक्त भाग्यवान्
’माधव मिश्रेर पुत्र’ कहि व्यवहारे
सकल वैष्णव प्रीति वासेन इङ्हारे
 
 
अनुवाद
मुकुंद ने कहा, "उनका नाम श्री गदाधर है। वे भाग्यशाली हैं क्योंकि बचपन से ही वे पारिवारिक जीवन से विरक्त रहे हैं। वे माधव मिश्र के पुत्र के रूप में प्रसिद्ध हैं। सभी वैष्णव उनसे बहुत स्नेह करते हैं।"
 
Mukunda said, "His name is Shri Gadadhara. He is fortunate because from childhood he has been detached from family life. He is famous as the son of Madhava Mishra. All Vaishnavas love him very much."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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