श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.7.52 
বিষ্ণু-ভক্তি-তেজোময দেখি কলেবর
আকৃতি, প্রকৃতি—দুই পরম সুন্দর”
विष्णु-भक्ति-तेजोमय देखि कलेवर
आकृति, प्रकृति—दुइ परम सुन्दर”
 
 
अनुवाद
"मैं देख सकता हूँ कि भगवान विष्णु की भक्ति के कारण उनका शरीर दैदीप्यमान है। उनका रूप और स्वभाव दोनों ही मनमोहक हैं।"
 
"I can see that his body is radiant due to his devotion to Lord Vishnu. Both his form and nature are captivating."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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