श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.7.47 
অদ্ভুত বৈষ্ণব আজি দেখাব তোমারে
সেবক করিযা যেন স্মরহ আমারে”
अद्भुत वैष्णव आजि देखाब तोमारे
सेवक करिया येन स्मरह आमारे”
 
 
अनुवाद
“आज मैं तुम्हें एक अद्भुत वैष्णव दिखाऊंगा, ताकि तुम मुझे अपना सेवक समझो।”
 
“Today I will show you a wonderful Vaishnava, so that you will consider me your servant.”
तात्पर्य
"जो मैं तुमको अत्यन्त उत्तम वैष्णव से मिलाऊंगा तो प्रतिभाव करो कि तुम मुझे तेरा मनुष्य बना लो। यह मेरा बदला होगा।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)