श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.7.46 
গদাধর পণ্ডিত, শুনহ সাবধানে
বৈষ্ণব দেখিতে যে বাঞ্চহ তুমি মনে
गदाधर पण्डित, शुनह सावधाने
वैष्णव देखिते ये वाञ्चह तुमि मने
 
 
अनुवाद
“हे गदाधर पंडित, ध्यान से सुनो। क्या तुम किसी वैष्णव को देखना चाहोगे?
 
"O Gadadhara Pandita, listen carefully. Would you like to see a Vaishnava?
तात्पर्य
गदाधर पण्डित बहुत ही मुकुंद के प्रिय थे। मुकुंद ने उन्हें पुण्डरीक के आने की सूचना दे दी और इस तरह से उनके मन में एक बहुत बड़े महा-भागवत वैष्णव को देखने की उत्सुकता बढ़ गई।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)