श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.7.44 
মুকুন্দের বড প্রিয পণ্ডিত-গদাধর
একান্ত মুকুন্দ তাঙ্র সঙ্গে অনুচর
मुकुन्देर बड प्रिय पण्डित-गदाधर
एकान्त मुकुन्द ताङ्र सङ्गे अनुचर
 
 
अनुवाद
गदाधर पंडित मुकुंद को बहुत प्रिय थे। वे मुकुंद के निरंतर साथी थे।
 
Gadadhara was very dear to Pandit Mukunda. He was Mukunda's constant companion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)