श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.7.41 
বিদ্যানিধি-আগমন জানিযা গোসাঞি
যে আনন্দ হৈল, তাহার অন্ত নাই
विद्यानिधि-आगमन जानिया गोसाञि
ये आनन्द हैल, ताहार अन्त नाइ
 
 
अनुवाद
विद्यानिधि के आगमन के बारे में जानकर भगवान को असीम प्रसन्नता हुई।
 
The Lord was immensely pleased to know about the arrival of Vidyanidhi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)