श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.7.40 
শ্রী-মুকুন্দ বেজ ওঝা তাঙ্র তত্ত্ব জানে
এক সঙ্গে মুকুন্দের জন্ম চাটিগ্রামে
श्री-मुकुन्द वेज ओझा ताङ्र तत्त्व जाने
एक सङ्गे मुकुन्देर जन्म चाटिग्रामे
 
 
अनुवाद
विद्वान चिकित्सक श्री मुकुन्द उन्हें जानते थे, क्योंकि वे दोनों चट्टग्राम में पैदा हुए थे।
 
The learned physician Sri Mukunda knew him, as they were both born in Chittagong.
तात्पर्य
इस समय तक कोई भी वैष्णव पुण्डरीक की वास्तविक महिमा नहीं जानता था। केवल चट्टग्राम के विद्वान डॉक्टर मुकुंद दत्त ही उनके बारे में जानते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)