श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.7.39 
বৈষ্ণব-সমাজে ইহা কেহ নাহি জানে
সবে মাত্র মুকুন্দ জানিলা সেই-ক্ষণে
वैष्णव-समाजे इहा केह नाहि जाने
सबे मात्र मुकुन्द जानिला सेइ-क्षणे
 
 
अनुवाद
मुकुंद को छोड़कर कोई भी वैष्णव उन्हें नहीं जानता था, जिन्होंने उन्हें तुरंत पहचान लिया।
 
None of the Vaishnavas knew him except Mukunda, who recognized him immediately.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)