श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.7.33 
কহি তাঙ্র কথা প্রভু আবিষ্ট হৈলা
’পুণ্ডরীক বাপ’ বলি’ কান্দিতে লাগিলা
कहि ताङ्र कथा प्रभु आविष्ट हैला
’पुण्डरीक बाप’ बलि’ कान्दिते लागिला
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भगवान् विह्वल हो गये और रोने लगे और पुकारने लगे, “हे पुण्डरीक, हे पिता!”
 
Saying this, the Lord became distraught and started crying and calling out, “O Pundrik, O father!”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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