श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.7.31 
তাঙ্রে ঝাট কেহৈ চিনিতে না পারিবা
দেখিলে ’বিষযী মাত্র জ্ঞান সে করিবা
ताङ्रे झाट केहै चिनिते ना पारिबा
देखिले ’विषयी मात्र ज्ञान से करिबा
 
 
अनुवाद
“उसे देखकर तुममें से कोई भी उसे तुरन्त पहचान नहीं सकेगा; बल्कि तुम उसे केवल भौतिकवादी ही समझोगे।
 
“None of you would immediately recognize him upon seeing him; rather, you would think of him as a mere materialist.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)