श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.7.3 
জয শ্রী-জগদানন্দ-শ্রীগর্ভ-জীবন
জয পুণ্ডরীক-বিদ্যানিধি-প্রাণ-ধন
जय श्री-जगदानन्द-श्रीगर्भ-जीवन
जय पुण्डरीक-विद्यानिधि-प्राण-धन
 
 
अनुवाद
श्री जगदानंद और श्रीगर्भ के जीवन और आत्मा की जय हो! पुण्डरीक विद्यानिधि के धन और जीवन की जय हो!
 
Hail the life and soul of Sri Jagadananda and Srigarbha! Hail the wealth and life of Pundarik Vidyanidhi!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)