श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.7.26 
গঙ্গায যে-সব লোক করে অনাচর
কুল্লোল, দন্ত-ধাবন, কেশ-সṁস্কার
गङ्गाय ये-सब लोक करे अनाचर
कुल्लोल, दन्त-धावन, केश-सꣳस्कार
 
 
अनुवाद
“बहुत से लोग गंगा के जल में कुल्ला करके, दांत साफ करके और बाल धोकर गंगा का अनादर करते हैं।
 
“Many people disrespect the Ganga by gargling, brushing teeth and washing hair in its water.
तात्पर्य
कुल्लोला शब्द का अर्थ है ''मुंह धोना।''
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)