श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  2.7.2 
জয জয শ্রী-গৌরসুন্দর সর্ব-প্রাণ
জয নিত্যানন্দ-অদ্বৈতের প্রেম-ধাম
जय जय श्री-गौरसुन्दर सर्व-प्राण
जय नित्यानन्द-अद्वैतेर प्रेम-धाम
 
 
अनुवाद
सबके जीवन और आत्मा श्री गौरसुन्दर की जय हो! नित्यानंद और अद्वैत के प्रेम के धाम की जय हो!
 
Hail to Sri Gaurasundara, the life and soul of all! Hail to the abode of eternal bliss and non-dual love!
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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