श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 155
 
 
श्लोक  2.7.155 
যোগ্য গুরু-শিষ্য—পুণ্ডরীক-গদাধর
দুই কৃষ্ণ-চৈতন্যের প্রিয-কলেবর
योग्य गुरु-शिष्य—पुण्डरीक-गदाधर
दुइ कृष्ण-चैतन्येर प्रिय-कलेवर
 
 
अनुवाद
पुण्डरीक और गदाधर आदर्श आध्यात्मिक गुरु और शिष्य थे। वे दोनों ही श्री कृष्ण चैतन्य के प्रिय थे।
 
Pundarika and Gadadhara were ideal spiritual teachers and disciples. They were both loved by Sri Krishna Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)