श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  2.7.154 
কহিলাম কিছু বিদ্যানিধির আখ্যান
এই মোর কাম্য—যেন দেখা পাঙ তান
कहिलाम किछु विद्यानिधिर आख्यान
एइ मोर काम्य—येन देखा पाङ तान
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने पुण्डरीक विद्यानिधि के विषय में कुछ बातें बताई हैं। मेरी एकमात्र इच्छा यही है कि मैं किसी दिन उनका दर्शन कर सकूँ।
 
Thus I have told you a few things about Pundarika Vidyanidhi. My only wish is to be able to see him someday.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)