श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  2.7.153 
কি কহিব আর পুণ্ডরীকের মহিমাগ
দাধর-শিষ্য যাঙ্র, ভক্তের সেই সীমা
कि कहिब आर पुण्डरीकेर महिमाग
दाधर-शिष्य याङ्र, भक्तेर सेइ सीमा
 
 
अनुवाद
पुण्डरीक की महिमा के विषय में मैं और क्या कह सकता हूँ, जिनके पास गदाधर जैसा शिष्य था? वे सर्वोच्च भक्त थे।
 
What more can I say about the greatness of Paundarik, who had a disciple like Gadadhara? He was the supreme devotee.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)