vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
»
श्लोक 150
श्लोक
2.7.150
এতেকে উহান আমি হৈবাঙ শিষ্য
শিষ্য-অপরাধ গুরু ক্ষমিবে অবশ্য”
एतेके उहान आमि हैबाङ शिष्य
शिष्य-अपराध गुरु क्षमिबे अवश्य”
अनुवाद
“इसलिए मैं उनका शिष्य बनना चाहता हूँ, क्योंकि आध्यात्मिक गुरु अपने शिष्य के अपराधों को अवश्य क्षमा कर देंगे।”
“That is why I want to become his disciple, because the spiritual master will definitely forgive the crimes of his disciple.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×