श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  2.7.149 
“না জানিযা উহান অগম্য ব্যবহার
চিত্তে অবজ্ঞান হৈযাছিল আমার
“ना जानिया उहान अगम्य व्यवहार
चित्ते अवज्ञान हैयाछिल आमार
 
 
अनुवाद
“मैं उनकी अथाह विशेषताओं को नहीं समझ पाया, और इस प्रकार मेरे हृदय में कुछ अनादर उत्पन्न हुआ।
 
“I did not understand His unfathomable qualities, and thus some disrespect arose in my heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)