श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  2.7.148 
গদাধর আজ্ঞা মাগিলেন প্রভু-স্থানে
পুণ্ডরীক-মুখে মন্ত্র-গ্রহণ-কারণে
गदाधर आज्ञा मागिलेन प्रभु-स्थाने
पुण्डरीक-मुखे मन्त्र-ग्रहण-कारणे
 
 
अनुवाद
तब गदाधर ने भगवान से पुण्डरीक से मंत्र दीक्षा लेने की अनुमति मांगी।
 
Then Gadadhara asked the Lord for permission to take mantra initiation from Pundrik.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)