ক্ষণেকে যে হৈল প্রেম-ভক্তি-আবির্ভাব
তাহা বর্ণিবার পাত্র—ব্যাস মহাভাগ
क्षणेके ये हैल प्रेम-भक्ति-आविर्भाव
ताहा वर्णिबार पात्र—व्यास महाभाग
अनुवाद
उस समय प्रकट हुए प्रेम और भक्ति का वर्णन करने के लिए केवल परम भाग्यशाली व्यासदेव ही योग्य हैं।
Only the most fortunate Vyasadeva is qualified to describe the love and devotion that manifested at that time.
तात्पर्य
श्री कृष्ण-द्वैपायन व्यास कृष्ण के क्रीड़ा-वर्णन में और वैष्णवों के लक्षणों के प्रकाशन में समर्थ हैं, इसीलिए ग्रंथकार ने अपनी काव्य प्रवीणता को कुछ भी कहने में समर्थ न मानकर कहा है। ऐसे वर्णन करने वाले श्री वेदव्यास ही ग्रंथकार की त्रुटियों को दूर करने में समर्थ हैं, जिन्होंने ऐसे वर्णन करके संसार की शोभा बढ़ाई है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥