श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  2.7.144 
শ্রী-প্রেমনিধির আসি’ হৈল বাহ্য-জ্ঞান
তখনে সে প্রভু চিনি’ করিলা প্রণাম
श्री-प्रेमनिधिर आसि’ हैल बाह्य-ज्ञान
तखने से प्रभु चिनि’ करिला प्रणाम
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्री प्रेमनिधि को पुनः चेतना प्राप्त हुई। अपने प्रभु को पहचानकर उन्होंने प्रणाम किया।
 
Sri Premanidhi then regained consciousness. Recognizing his Lord, he bowed down to Him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)