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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
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श्लोक 142
श्लोक
2.7.142
প্রভু বলে,—“আজি শুভ প্রভাত আমার
আজি মহা-মঙ্গল সে বাসি আপনার
प्रभु बले,—“आजि शुभ प्रभात आमार
आजि महा-मङ्गल से वासि आपनार
अनुवाद
प्रभु बोले, "आज मेरी सुबह अत्यंत शुभ थी। आज मुझे महान शुभता का अनुभव हुआ।"
The Lord said, "Today my morning was very auspicious. Today I experienced great auspiciousness."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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