श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  2.7.141 
এই-মত তাঙ্র গুণ বর্ণিযা বর্ণিযাউ
চ্চৈঃস্বরে ’হরি’ বলে শ্রী-ভুজ তুলিযা
एइ-मत ताङ्र गुण वर्णिया वर्णियाउ
च्चैःस्वरे ’हरि’ बले श्री-भुज तुलिया
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपने गुणों का वर्णन करते हुए भगवान ने अपनी भुजाएँ ऊपर उठाईं और जोर से हरि नाम का जप किया।
 
Thus describing His qualities, the Lord raised His arms and loudly chanted the name Hari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)