श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  2.7.138 
“আজি কৃষ্ণ বাঞ্ছা-সিদ্ধি করিলা আমার
আজি পাইলাঙ সর্ব-মনোরথ-পার”
“आजि कृष्ण वाञ्छा-सिद्धि करिला आमार
आजि पाइलाङ सर्व-मनोरथ-पार”
 
 
अनुवाद
"आज भगवान कृष्ण ने मेरी मनोकामनाएँ पूरी कर दी हैं। आज मुझे वह प्राप्त हो गया है जो मेरे स्वप्न से भी परे है।"
 
"Today Lord Krishna has fulfilled my wishes. Today I have achieved what is beyond my dreams."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)