श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  2.7.137 
প্রহরেক গৌরচন্দ্র আছেন নিশ্চলে
তবে প্রভু বাহ্য পাই’ ডাকি ’হরি’ বলে
प्रहरेक गौरचन्द्र आछेन निश्चले
तबे प्रभु बाह्य पाइ’ डाकि ’हरि’ बले
 
 
अनुवाद
गौरचन्द्र तीन घंटे तक वहीं स्थिर रहे। तत्पश्चात भगवान को अपनी चेतना वापस मिली और उन्होंने हरि नाम का जप किया।
 
Gaurachandra remained motionless for three hours. Then the Lord regained consciousness and chanted the name Hari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)