श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  2.7.136 
বক্ষঃ হৈতে বিদ্যানিধি না ছাডে ঈশ্বরে
লীন হৈলা যেন প্রভু তাঙ্হার শরীরে
वक्षः हैते विद्यानिधि ना छाडे ईश्वरे
लीन हैला येन प्रभु ताङ्हार शरीरे
 
 
अनुवाद
विद्यानिधि ने भगवान को अपनी छाती से अलग नहीं किया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो भगवान उनके शरीर में विलीन हो गए हों।
 
Vidyanidhi did not separate the Lord from his chest. It appeared as if the Lord had merged into his body.
तात्पर्य
जब महाप्रभु ने प्यार से विद्यानidhi को गले लगाया, विद्यानidhi ने भगवान को अपने सीने से इतने जोर से लगाया कि उनके अलग-अलग रूपों में कोई फर्क नहीं कर सका। वे एक हो गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)