श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  2.7.133 
তখন সে হৈল সব-বৈষ্ণব-রোদন
পরম অদ্ভুত—তাহা না যায বর্ণন
तखन से हैल सब-वैष्णव-रोदन
परम अद्भुत—ताहा ना याय वर्णन
 
 
अनुवाद
तब सभी वैष्णव हर्ष से रोने लगे। वह दृश्य अत्यंत अद्भुत था, जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।
 
Then all the Vaishnavas began to cry with joy. The scene was so amazing that words cannot describe it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)