श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  2.7.130 
নিজ প্রিযতম জানি’ শ্রী-ভক্ত-বত্সল
সṁভ্রমে উঠিযা কোলে কৈলা বিশ্বম্ভর
निज प्रियतम जानि’ श्री-भक्त-वत्सल
सꣳभ्रमे उठिया कोले कैला विश्वम्भर
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि उनका प्रिय भक्त आ गया है, विश्वम्भर, जो अपने भक्तों पर अत्यन्त स्नेह करते हैं, आदरपूर्वक उठे और उन्हें गले लगा लिया।
 
Knowing that his beloved devotee had arrived, Visvambhara, who is very affectionate towards his devotees, respectfully stood up and embraced him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)