श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.7.127 
“কৃষ্ণ রে, পরাণ মোর, কৃষ্ণ মোর বাপ
মুঞি অপরাধীরে কতেক দেহ’ তাপ
“कृष्ण रे, पराण मोर, कृष्ण मोर बाप
मुञि अपराधीरे कतेक देह’ ताप
 
 
अनुवाद
"हे कृष्ण, हे मेरे जीवन और आत्मा। हे कृष्ण, मेरे बच्चे। आप इस अपराधी को कितना कष्ट दे रहे हैं। हे कृष्ण! ...
 
"O Krishna, O my life and soul. O Krishna, my child. How much suffering you are causing to this criminal. O Krishna!...
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)