श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.7.122 
বিদ্যানিধি আগমন শুনি’ বিশ্বম্ভর
অনন্ত হরিষ প্রভু হৈল অন্তর
विद्यानिधि आगमन शुनि’ विश्वम्भर
अनन्त हरिष प्रभु हैल अन्तर
 
 
अनुवाद
विद्यानिधि के आगमन की खबर सुनकर भगवान विश्वम्भर को असीम प्रसन्नता हुई।
 
Lord Vishvambhar was extremely happy to hear the news of Vidyanidhi's arrival.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)