श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.7.12 
নৃত্য করি’ উঠিযা বসিলা গৌর-রায
’পুণ্ডরীক বাপ’ বলি’ কান্দে উভরায
नृत्य करि’ उठिया वसिला गौर-राय
’पुण्डरीक बाप’ बलि’ कान्दे उभराय
 
 
अनुवाद
एक दिन नृत्य करने के बाद गौरा राय बैठ गए और जोर से रोते हुए बोले, “हे मेरे पिता, पुण्डरीक।”
 
One day after dancing, Gaura Rai sat down and cried loudly, “O my father, Pundrik.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)