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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
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श्लोक 117
श्लोक
2.7.117
শুনিযা হাসেন পুণ্ডরীক বিদ্যানিধি
আমারে ত’ মহারত্ন মিলাইলা বিধি
शुनिया हासेन पुण्डरीक विद्यानिधि
आमारे त’ महारत्न मिलाइला विधि
अनुवाद
यह सुनकर पुण्डरीक विद्यानिधि मुस्कुराये और बोले, “मुझे ईश्वर की कृपा से एक बहुमूल्य रत्न प्राप्त हुआ है।
Hearing this, Pundrik Vidyanidhi smiled and said, “By the grace of God, I have received a precious gem.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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