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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
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श्लोक 115
श्लोक
2.7.115
শিশু হৈতে ঈশ্বরের সঙ্গে অনুচর
গুরু-শিষ্য-যোগ্য পুণ্ডরীক-গদাধর
शिशु हैते ईश्वरेर सङ्गे अनुचर
गुरु-शिष्य-योग्य पुण्डरीक-गदाधर
अनुवाद
“वह बचपन से ही भगवान के निरंतर साथी रहे हैं; इसलिए पुण्डरीक और गदाधर आदर्श गुरु और शिष्य हैं।
“He has been the Lord's constant companion since childhood; therefore, Pundarika and Gadadhara are ideal guru and disciple.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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