श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.7.113 
এবে তার প্রাযশ্চিত্ত চিন্তিলা আপনে
মন্ত্র-দীক্ষা করিবেন তোমারৈ স্থানে
एबे तार प्रायश्चित्त चिन्तिला आपने
मन्त्र-दीक्षा करिबेन तोमारै स्थाने
 
 
अनुवाद
“अपने अपराध का प्रायश्चित करने के लिए, उसने अब आपसे दीक्षा लेने का निर्णय लिया है।
 
“To atone for his crime, he has now decided to take initiation from you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)