श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  2.7.110 
দেখিযা সন্তোষ বিদ্যানিধি মহাশয
কোলে করি’ থুইলেন আপন হৃদয
देखिया सन्तोष विद्यानिधि महाशय
कोले करि’ थुइलेन आपन हृदय
 
 
अनुवाद
यह देखकर विद्यानिधि महाशय अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने गदाधर को गले लगा लिया और अपनी छाती से लगा लिया।
 
Seeing this, Vidyanidhi Mahashay was very happy and he embraced Gadadhara and held him close to his chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)