श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.7.11 
নবদ্বীপে করিলেন ঈশ্বর প্রকাশ
বিদ্যানিধি না দেখিযা ছাডে ঘন-শ্বাস
नवद्वीपे करिलेन ईश्वर प्रकाश
विद्यानिधि ना देखिया छाडे घन-श्वास
 
 
अनुवाद
यद्यपि भगवान स्वयं नवद्वीप में प्रकट हुए थे, किन्तु विद्यानिधि को वहाँ न देख पाने के कारण उन्होंने गहरी आह भरी।
 
Although the Lord Himself appeared in Navadvipa, He sighed deeply because He could not see Vidyanidhi there.
तात्पर्य
जब श्री महाप्रभु नवद्वीप नगर में अपने उच्च वैकुंठ लीला का प्रदर्शन कर रहे थे, तब विद्यानिधि के वियोग में उन्होंने गहरी सांस ली।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)