श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  2.7.109 
গদাধর পণ্ডিতের নযনের জল
অন্ত নাহি, ধারা অঙ্গ তিতিল সকল
गदाधर पण्डितेर नयनेर जल
अन्त नाहि, धारा अङ्ग तितिल सकल
 
 
अनुवाद
गदाधर पंडित के अथाह आँसुओं ने उनके पूरे शरीर को गीला कर दिया।
 
Gadadhara Pandit's immense tears wet his entire body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)