श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  2.7.106 
এত ভাবি’ গদাধর মুকুন্দের স্থানে
দীক্ষা করিবার কথা কহিলেন তানে
एत भावि’ गदाधर मुकुन्देर स्थाने
दीक्षा करिबार कथा कहिलेन ताने
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विचार करने के बाद गदाधर ने मुकुंद से पुण्डरीक से दीक्षा लेने की इच्छा व्यक्त की।
 
After thinking thus, Gadadhara expressed his desire to Mukunda to take initiation from Pundrik.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)