श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  2.7.103 
এ পথে প্রবিষ্ট যত, সব ভক্ত-গণে
উপদেষ্টা অবশ্য করেন এক-জনে
ए पथे प्रविष्ट यत, सब भक्त-गणे
उपदेष्टा अवश्य करेन एक-जने
 
 
अनुवाद
“भक्ति मार्ग पर चलने वाले सभी भक्तों के पास एक आध्यात्मिक गुरु होना चाहिए।
 
“All devotees following the path of devotion must have a spiritual master.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)