श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.7.102 
যত-খানি আমি করিযাছি অপরাধ
তত-খানি করাইবা চিত্তের প্রসাদ
यत-खानि आमि करियाछि अपराध
तत-खानि कराइबा चित्तेर प्रसाद
 
 
अनुवाद
“मैंने अपराध किया है, अतः कृपया मुझ पर दया करें ताकि मेरा अपराध नष्ट हो जाए।
 
“I have committed a crime, so please have mercy on me so that my crime may be destroyed.
तात्पर्य
गदाधर ने कहा, "पुंडरीक विद्यानidhi को न समझकर, मैंने उनके चरण कमलों पर अपराध किया है। अब आप (मुखुंद) कृपया मेरे इस अपराध के नाश में सहायता करके मुझ पर दया करें। इस तरह मेरे हृदय की मैल धुल जाएगी, और मैं आपकी दया पाने के योग्य बन जाऊंगा।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)