श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  2.6.95 
শুতিযা আছিলুঙ্ ক্ষীর-সাগর-ভিতরে
নিদ্রা-ভঙ্গ হৈল মোর তোমার হুঙ্কারে
शुतिया आछिलुङ् क्षीर-सागर-भितरे
निद्रा-भङ्ग हैल मोर तोमार हुङ्कारे
 
 
अनुवाद
“मैं क्षीरसागर में सो रहा था, किन्तु आपकी तीव्र पुकार ने मेरी नींद तोड़ दी।
 
“I was sleeping in the Kshirsagar, but your loud call broke my sleep.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)