श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  2.6.91 
ক্ষিতি অন্তরীক্ষে স্থান নাহি অবকাশে
দেখে পডিযাছে মহা-ঋষি-গণ পাশে
क्षिति अन्तरीक्षे स्थान नाहि अवकाशे
देखे पडियाछे महा-ऋषि-गण पाशे
 
 
अनुवाद
पृथ्वी और आकाश में कोई स्थान रिक्त नहीं था। उन्होंने एक कोने में अनेक महान ऋषियों को दण्डवत् प्रणाम करते देखा।
 
There was no empty space on earth or in the sky. He saw many great sages prostrating in a corner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)