श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  2.6.88 
দেখে শত ফণাধর মহা-নাগ-গণ
ঊর্ধ্ব বাহু স্তুতি করে তুলি’ সব ফণ
देखे शत फणाधर महा-नाग-गण
ऊर्ध्व बाहु स्तुति करे तुलि’ सब फण
 
 
अनुवाद
उसने सैकड़ों फन वाले विशाल सर्पों को भगवान से प्रार्थना करते हुए अपनी भुजाएं उठाते देखा।
 
He saw huge snakes with hundreds of hoods raising their arms in prayer to God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)