श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  2.6.87 
দেখিযা সম্ভ্রমে দণ্ড-পরণাম ছাডি’
উঠিলা অদ্বৈত—অদ্ভুত দেখি বডি
देखिया सम्भ्रमे दण्ड-परणाम छाडि’
उठिला अद्वैत—अद्भुत देखि बडि
 
 
अनुवाद
उन ऐश्वर्यों को देखकर अद्वैत आश्चर्यचकित हो गये और अपने दण्डवत् आसन से उठ खड़े हुए।
 
Seeing those opulences, Advaita was astonished and stood up from his prostrated position.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)